आश्रम द्वारा अवगत कराया गया की उनके पूज्य गुरुदेव संत श्री आशारामजी बापू से मिलें संस्कारों से प्रेरित होकर उनके साधक, समाजरूपी देवता की सेवा का एक भी मौका चूकते नहीं हैं। जहां लोग अपने घरों में दीपावली मनाते है, वहीं प्रतिवर्ष आशारामजी बापू के साधक जरूरतमंद क्षेत्रों में जाकर, उनकी दीपावली भी अच्छी बनें इसलिए आवश्यक सामग्री के वितरण कार्यक्रम करते हैं।
परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः, परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
परोपकाराय दुहन्ति गावः, परोपकारार्थमिदं शरीरम् ॥
परोपकार के लिए वृक्ष फल देते हैं, नदीयाँ परोपकार के लिए ही बहती हैं और गाय परोपकार के लिए दूध देती हैं, (अर्थात्) यह शरीर भी परोपकार के लिए ही है ।
पिछले 50+ सालों से अनवरत आज भी उनकी यह संत श्री आसारामजी आश्रम ट्रस्ट देश-समाज और संस्कृति के उत्थान का कार्य कर रही है। भारत की राष्ट्रीय एकता-अखंडता और विश्व शांति के लिए संत श्री आशारामजी बापू ने राष्ट्र के कल्याणार्थ अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्हीं की प्रेरणा से हर साल दीपावली पर देशभर में जगह-जगह पर अनगिनत सेवाकार्यों की फुलझड़ियाँ लगाई जाती हैं। भगवन्नाम संकीर्तन यात्राओं के साथ वृद्धाश्रमों, अनाथालयों व अस्पतालों में निःशुल्क औषधि, फल व मिठाई वितरित की जाती है। हजारों जरूरतमंद के लिए विशाल भण्डारे का आयोजन किया जाता है। जिसमें मिठाई, कपड़े, खजूर, कम्बल, अनाज, चप्पल आदि सामग्री के साथ दक्षिणा इत्यादि दी जाती हैं।
प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी संत श्री आशारामजी बापू आश्रम ट्रस्ट, बेंगलुरु द्वारा दीपावली निमित्त जन सेवा अनाथाश्रम, गुब्ब्लाला झील के पास, तुराहल्ली फ़ोरेस्ट, बेंगलुरु में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जिनमें वहां के बच्चों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम किये गये, उन्हें ट्रस्ट के स्वयंसेवकों द्वारा योग व उच्च संस्कार कार्यक्रम के साथ जीवनोपयोगी कुंजियाँ भी बताई गई, कार्यक्रम के अंत में बच्चों में भोजन- प्रसादी तथा उनकी संस्था (अनाथाश्रम) में ट्रस्ट की तरफ़ से मिठाई, पटाखे, कपड़े, राशनकिट, और जीवनोपयोगी सामग्री आदि का वितरण किया गया।