Sant Shri Asharamji Bapu Ashram Trust in Bangalore organized Gau Grass Seva at Gaushala, Mahadevpura, Bengaluru, Karnataka, on 27th June 2026.
संत आशारामजी आश्रम ट्रस्ट, बेंगलुरु द्वारा हुई- गौ सेवा
बेंगलुरु: संत आशारामजी आश्रम ट्रस्ट की तरफ़ से पूर्णिमा की गौ सेवा के संकल्प हेतु इस पूर्णिमा पर महादेवपुरा में स्थित गौशाला में सेवा हुई। सेवा के प्रारंभ में सभी ने गौमाताओं को गंध-धूप, पुष्पादि से वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा पूजा-अर्चना आदि की। गौ माताओं का पूजन, गौ-आरती, परिक्रमा, दान-पुण्य आदि कर सभी साधकों ने गौ-प्रदक्षिणा की एवं उनकी चरण रज को माथे पर धारण किया। चूँकि गौमाता हम सभी की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक समरसता और आस्था की प्रतीक हैं। अतः मान्यता है की- जो गोपालन, गो-सेवा व गो-रक्षा का प्रण लेता है उसका जीवन धन्य हो जाता है और जीवन की हर मनोकामना पूरी होती है। बेंगलुरु आश्रम संचालक- दीपक नायक ने बताया की- हमारी भारतीय संस्कृति और धर्म में गौमाता को विशेष महत्व दिया गया है। गौं को हमारी संस्कृति में पवित्र माना जाता है और हमारे देश के संस्कारों में गौं का सम्मान किया जाता है। हालांकि, हमारे देश में गौमाता के स्वास्थ्य और सुरक्षा में अहम समस्याएं हैं। गौमाता को बेहद ही कठिन शरीरी मुद्दों से सामना पड़ता है इसलिए, गौ सेवा एक ऐसा अभियान है- जो गौमाता के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए होता है।
पूज्य संत आशारामजी बापू अपने सत्संग वचनामृत में बताते हैं की- जीवन में गीता और गाय का जितना आदर करेंगे उतने स्वस्थ, समतावान और आत्मवान बन जायेंगे। बच्चों को देशी गाय का दूध पिलाओ, गाय पालो, गायों की सेवा करो। जैसे वृद्ध माँ की सेवा करते हैं ऐसे बूढ़ी गायों की भी सेवा करो, इससे आपको कोई घाटा नहीं पड़ेगा। तो आप लोग गोदुग्ध से, गौ-गोबर से, गोमूत्र से स्वास्थ्य- लाभ उठाइये, कसाईखाने में गाय जाय उसकी अपेक्षा गाय पालना शुरू कर दो गाय जहाँ बँधती है, उधर टी.बी और दमे के कीटाणु नहीं पनपते हैं। आपके घर-मोहल्ले में गाय का जरा चक्कर लगवा दो तो भूत-प्रेत, डाकिनी शाकिनी की बाधा दूर हो जाती है; ऐसा कहा गया है। जिसमें वशिष्ठ यादव, दुर्गाराम, खुशाल माखीजानी,रथ मुंडा, पवन कुमार, नभ नाहक, हार्दिक पटेल, नितिन आर्य, योगिता माखीजानी, रूपल आर्य, गौरीसा आर्य, कोपल अग्रवाल, शीतल जेप, दीप्ति, वंदना उप्रेती, ज्योति साहू, और कांता रानी आदि मुख्य सेवादार रहें।