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8.12.22: बेंगलुरु: संत श्री आशारामजी आश्रम ट्रस्ट की तरफ़ से प्रति पूर्णिमा की गौग्रास सेवा के संकल्प हेतु इस मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर मारथाहल्ली आउटर रिंग रोड, महादेवपूरा में स्थित बैंगलोर गौरक्षण शाला में, गौमाताओं को गंध-धूप, पुष्पादि से वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा पूजा-अर्चना आदि की। गौ माताओं का पूजन, गौ-आरती, परिक्रमा, दान-पुण्य आदि कर सभी साधकों ने गौ-प्रदक्षिणा की एवं उनकी चरण रज को माथे पर धारण किया ।
>चूँकि गौमाता हम सभी की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक समरसता और आस्था की प्रतीक हैं। अतः मान्यता है की- जो गोपालन, गो-सेवा व गो-रक्षा का प्रण लेता है उसका जीवन धन्य हो जाता है और जीवन की हर मनोकामना पूरी होती है।
पूज्य संत श्री आशारामजी बापू अपने सत्संग वचनामृत में बताते हैं की-"जीवन में गीता और गाय का जितना आदर करेंगे उतने स्वस्थ, समतावान और आत्मवान बन जायेंगे। बच्चों को देशी गाय का दूध पिलाओ, गाय पालो, गायों की सेवा करो। जैसे वृद्ध माँ की सेवा करते हैं ऐसे बूढ़ी गायों की भी सेवा करो, इससे आपको कोई घाटा नहीं पड़ेगा । तो आप लोग गोदुग्ध से, गौ-गोबर से, गोमूत्र से स्वास्थ्य- लाभ उठाइये, कसाईखाने में गाय जाय उसकी अपेक्षा गाय पालना शुरू कर दो गाय जहाँ बँधती है, उधर टी.बी और दमे के कीटाणु नहीं पनपते हैं। आपके घर-मोहल्ले में गाय का जरा चक्कर लगवा दो तो भूत-प्रेत, डाकिनी शाकिनी की बाधा दूर हो जाती है; ऐसा कहा गया है। गौ की पूँछ से श्रीकृष्ण को झाड़ दिया, बोलो ! 'हमारे कन्हैया को पूतना राक्षसी ने छुआ है तो कहीं उसकी नजर न लग जाय, उपद्रव न हो जाय, स्वास्थ्य न बिगड़ जाय ऐसी आशंका से गोपियों ने श्रीकृष्ण का गाय की पूँछ से उतारा किया, गोमूत्र से स्नान कराया और गाय के गोबर से तिलक किया। भागवत में ऐसा वर्णन आता है।"

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