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Sant Shri Asharamji Ashram, Bengaluru celebrated the 88th incarnation day of respected Bapuji with great enthusiasm by doing satsang-kirtan and lamp lighting by the devotees.


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संत अवतरण परम हितकारी- जन्म कर्म च मे दिव्यं
बेंगलुरु: संत श्री आशारामजी आश्रम, बेंगलुरु में साधकों द्वारा पूज्य बापूजी का 88वा अवतरण दिवस साध्वी सुशीला बहन के सान्निध्य में सत्संग-कीर्तन व दीपप्रज्वलन कार्यक्रम के साथ बड़े ही धूम-धाम से मनाया गया। उन्होंने सत्संग में बताया की- प्रातःस्मरणीय परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ऐसे महापुरुष है, जिन्होंने अपने शिष्यों को भक्तियोग और ज्ञानयोग के साथ-साथ कर्मयोग भी सिखाया हैं। पूज्यश्री का कहना है कि- कर्म को करने की कला जान लो और उसे कर्मयोग बनाओ तो कर्म आपको बांधने वाले नहीं, भगवान से मिलाने वाले हो जायेंगे। भगवान ने हमें जो जानने, मानने और करने की शक्तियाँ दी हैं, उनका सदुपयोग करों। परहित के लिए कर्म करने से करने की शक्ति का सदुपयोग होता है।
बेंगलुरु आश्रम संचालक दीपक नायक (कृष्णा भाई) द्वारा बताया गया की- पूज्य बापूजी के इन्हीं वचनों का आदर करते हुए, हम शिष्यों द्वारा पूरे भारत में उनका यह अवतरण दिवस- पुण्य दिवस बनकर समाज की व्यापक सेवा का निमित्त बनता है, इसे हर वर्ष ‘सेवा-सत्संग-दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। पूज्य बापूजी बताते है की- ‘इस दिवस पर जो भी सेवाकार्य करते हैं, वे करने का राग मिटाते हैं, भोगने का लालच मिटाते हैं और भगवान व गुरु के नाते परहित करते हैं। उन साधकों को जो आनंद आता होगा, जो कीर्तन में मस्ती आती होगी या गरीबों को भोजन कराने में जो संतोष का अनुभव होता होगा, विद्यार्थियों को नोटबुक बाँटने में तथा भिन्न-भिन्न सेवाकार्यों में जो आनंद आता होगा, वह आनंद अवर्णनीय होगा।
वह जीवन क्या जिस जीवन में, जीवन को मुक्त बना न सकें। वह अज्ञानी अभिमानी है, जो मन का मोह मिटा न सकें ।। मिटती है जिससे भ्रांति नही, मिलती है जिससे शांति नही। ऐ पथिक उसका त्याग करो, जो प्रियतम तक पहुँचा न सकें ।।

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