संत श्री आशारामजी आश्रम ट्रस्ट, बेंगलुरु द्वारा किडवई हॉस्पिटल में भोजन वितरण हुआ।
बेंगलुरु: वर्तमान समय में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इस चुनौती से पार पाने के लिए ट्रस्ट द्वारा एक पहल- निशुल्क भोजन वितरण अभियान चलाए जा रहे हैं। जहां पर कई जरुरतमंद परिवारों, बेसहारे और दिव्यांगों में नि:शुल्क भोजन वितरण के कार्यक्रम किये जा रहे हैं।
अमावस्या के शुभ अवसर पर अन्न और भोजन का दान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। नर-नारायण सेवा के तहत संत आशारामजी आश्रम ट्रस्ट, बेंगलुरु की ओर से शुक्रवार (5 जुलाई) को अमावस्या के निमित्त किडवई हॉस्पिटल में कैंसर मरीजों के लिए भोजन-प्रसाद वितरण कार्यक्रम का विशेष आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तहत करीब 300 असहाय मरीजों को ट्रस्ट की तरफ से निःशुल्क भोजन कराया गया। किडवई हॉस्पिटल के व्यवस्थापक- मंजे गौड़ा ने अपने हाथों से भोजन परोसते हुए, संत श्री आशारामजी आश्रम ट्रस्ट, बेंगलुरु के स्वयंसेवकों की इस पहल की सराहना की व ट्रस्ट को लिखित में आभार पत्र भी दिया।
पूज्य बापूजी अपने सत्संग में हिन्दू धर्म की तिथियों का महत्व बताते हैं- इसमें भी अमावस्या की तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस बार सोमवार के दिन अमावस्या पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या कहा जा रहा है। सोमवती अमावस्या के शुभ अवसर पर भगवान की पूजा के साथ स्नान-दान का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन लोग पवित्र नदी और सरोवरों में स्नान करते हैं तथा इस पवित्र दिन पर ब्राह्मणों तथा दीन-हीन, असहाय लोगों को दान देना बेहद पुण्यकारी माना जाता है।
दान देने के महत्व का उल्लेख करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कहा है- प्रगट चारि पद धर्म के कलि महुँ एक प्रधान। जेन केन बिधि दीन्हें दान करइ कल्यान॥
>इस धरती पर धर्म के चार चरण हैं, जिनमें सत्य, दया, तप और दान हैं। इन चारो चरणों में से दान रूपी चरण ही प्रधान है। दान के द्वारा ही मनुष्य का कल्याण हो सकता है। सोमवती अमावस्या के शुभ अवसर पर अन्न और भोजन का दान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस पुण्यकारी दिन पर दीन-हीन, असहाय लोगों को अन्न का दान करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही व्यक्ति कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ जाता है।