सामूहिक श्राद्ध में न केवल बेंगलुरु के जनसामान्य नें, बल्कि कर्नाटक, तमिलनाडु व केरल राज्य के भी कई लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। सभी ने श्राद्ध कर्म करने के पहले आश्रम में अपने घर परिवार की सुख-शांति के लिए हवन-यज्ञ किया तथा गायों की सेवा का संकल्प लेकर- सेवा का पुण्य अर्जित किया।
रविवार की सर्वपितृ अमावस्या के दिन संपूर्ण भारत के समस्त संत श्री आशारामजी आश्रमों में लाखों लोगों ने श्राद्धकर्म का लाभ लिया। पूज्य बापूजी की अनुपस्थिति में सम्पन्न किया गया यह श्राद्धकर्म भक्तों को यही प्रेरणा दें रहा था कि- एक न एक दिन सत्य की जीत होगी और हमारे पूज्य बापूजी जल्द ही हम सभी के बीच होंगे। अंत में आरती व भक्तों में महाप्रसाद (भंडारा) वितरण करके कार्यक्रम की पूर्णाहुति हुई।
आश्रम में यह भी बताया गया कि- संत श्री आशारामजी बापू का 59 वाँ आत्मसाक्षात्कार महोत्सव बेंगलुरु आश्रम में 27 सितम्बर (मंगलवार) को हर्षोल्लास से मनाया जायेगा। यह वह दिन है जिस दिन पूज्य बापूजी ने अपने सद्गुरुदेव साईं लीलाशाह बापू की कृपा से अपनी आत्मा में ही परमात्मा की अनुभूति की थी। इस दिन को पूज्य बापूजी के भक्त 'आत्मसाक्षात्कार दिवस' के रूप में मानते हैं।