(Special Edition) Vivek ke Prakash se hi Sansar dikhie deti hai: Shri Narayan Sai Ji in Bengaluru

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April 28, 2011

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जिस तरह मोतियाबिंद होने से दिखाई देना बंद हा जाता है, उसी तरह जिस इंसान के हदय में मोतिया हो गया है उसे इस संसार में मानव जीवन का कर्तव्य दिखाई नहीं देता है। मानव जीवन अमूल्य है। यह विचार बनशंकरी स्थित संत श्री आसाराम जी बापू आश्रम, बंगलुरु में बुधवार को आयोजित महासत्संग में नारायण प्रेम साईं ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज इंसान अपना समय मूल्यहीन बातों में व्यतीत कर रहा है। भगवान की यह कृपा है कि हमें मनुष्य जीवन मिला, रुपए मिले, गाड़ी मिली और नौकरी मिली |

लेकिन इन सब चीजों के साथ यदि विवेक भी मिल जाए तो इस विवक के प्रकाश में संसार ठीक से दिखाई देगा । उन्होंने कहा कि संसार में हर कोई चाहता है कि वह दुख से बच जाए, लेकिन वे दुखी होने से बच नहीं पाता। भौतिक सुविधाएं मिलने के बाद भी अंतर करण में तृप्ति नहीं मिलती और हर वक्त चिंता सताती रहती है। उन्होंने कहा कि संसारिक चीजें पूर्ण शान्ति देने में असमर्थ है उसकी पूर्ति अध्यात्म शान्ति से ही संभव है। इसी का महत्व समझकर आज स्कूलों-कॉलेजों में ध्यान योग और प्राणायाम आवश्यक किये जा रहे है।

28 04 2011

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