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With the inspiration of Sant Shri Asharamji Bapu; Ashram Bengaluru organized a Pongal Makar Sankranti celebration on 14.01.24.
Makar Sankranti is a very pious day in t he Sanatan tradition. Japa, Dhyana, Sadhana & Daan Punya Ki Mahima is highly spoken of on this day.
Sant Shri Asharamji Bapu presses on spending every moment of #Uttarayan_Parva in highest deeds & contemplation on the all-pervasive 'Brahman'.

संत श्री आशारामजी आश्रम, बेंगलुरु में मनाया गया- पोंगल पर्व
बेंगलुरु: संत आशारामजी आश्रम, बेंगलुरु में 14 जनवरी (रविवार) को पोंगल का त्यौहार बड़े ही धूम-धाम से मनाया गया। उत्तर भारत के मकर संक्रांति त्योहार को ही दक्षिण भारत में 'पोंगल' के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार गोवर्धन पूजा, दिवाली और मकर संक्रांति का मिला-जुला रूप है। पोंगल विशेष रूप से किसानों का पर्व है। दक्षिण भारत में सूर्य के उत्तरायण होने वाले दिन पोंगल से ही नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इस त्योहार पर गाय के दूध के उफान को बहुत महत्व दिया जाता है। इसका कारण है कि जिस प्रकार दूध का उफान शुद्ध और शुभ है उसी प्रकार प्रत्येक प्राणी का मन भी शुद्ध संस्कारों से उज्ज्वल होना चाहिए इसीलिए नए बर्तनों में दूध उबाला जाता है।
>दक्षिण भारत में धान की फसल समेटने के बाद लोग खुशी प्रकट करने के लिए पोंगल का त्योहार मनाते हैं और भगवान से आगामी फसल के अच्छे होने की प्रार्थना करते हैं। समृद्धि लाने के लिए वर्षा, धूप, सूर्य, इन्द्रदेव तथा खेतिहर मवेशियों की पूजा और आराधना की जाती है।
पूज्य बापूजी अपने सत्संग अमृत में बताते हैं की- "इस पर्व के दिन सूर्यनारायण मकर राशि में प्रवेश करते हैं इसलिए इसको मकर कहते हैं। हर महीने संक्रांति होती है परंतु यह संक्रांति सम्यक् क्रांति का संदेश देती है; लड़-झगड़ के क्रांति नहीं, विधिवत् सबके उत्थान और मंगल की दिशा में ले जानेवाले जो विचार हैं, उन विचारों की प्रेरणा देनेवाली संक्रांति। इस दिन से सूर्य की गति उत्तर की तरफ हो जाती है, अंधकार कम होता चला जाता है, प्रकाश बढ़ता जाता है। भारतीय संस्कृति ने हमेशा ज्ञान-प्रकाश की, आत्मसुख की आराधना- उपासना की है। तप, त्याग का संदेश दे के जीव को ब्रह्मत्व की यात्रा करानेवाला पावन दिवस है- मकर संक्रांति- पोंगल।"

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