संत श्री आशारामजी आश्रम, बेंगलुरु द्वारा विद्यापीठ गुरुकुल, केंगेरी में रक्षाबंधन पर्व का आयोजन हुआ।
रक्षाबंधन के निमित्त विद्यापीठ गुरुकुल, केंगेरी में संत श्री आशारामजी आश्रम, बेंगलुरु द्वारा सामूहिक राखी बांधने के कार्यक्रम का आयोजन हुआ। बाल्यकाल से ही बच्चों में हँसते-खेलते महानता के संस्कार, अपनी योग्यताओं को विकसित करने के अवसर बच्चों को सहज में ही मिलें इसी हेतु से वहां सर्वप्रथम बालसंस्कार की कक्षायें चलाई गई। फिर वहां सभी बहनों ने बड़े उत्साह से राखी की थाली (रोली- कुमकुम, अक्षत, दीपक और राखी से) सजाई, इसके बाद सभी ने भाईयों को वैदिक रीति से मंत्रोच्चार द्वारा तिलक लगाकर उनके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी राखी बांधें, आरती उतारें, फिर भाईयों को मिठाई खिलाएं। फिर सभी बहनों ने भाइयों के सिर पर हाथ रखके उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुये संकल्प किया, अंततः फिर पूर्णाहुति पर पूज्य बापूजी की मंगल आरती की गई और ट्रस्ट द्वारा बच्चों को नोटबुक व प्रसाद बांटे गये।
गुरुकुल की बालिका ने बताया की- रक्षाबंधन को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं, उन्ही में से एक- महाभारत काल से जुड़ी एक कथा है। जब शिशुपाल के साथ युद्ध के समय भगवान विष्णु की तर्जनी उंगली कट गई थी तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनके हाथ पर बांध दिया था। इसके बाद भगवान ने द्रौपदी को उसकी रक्षा का वचन दिया था। अपने वचन के अनुसार, भगवान कृष्ण ने ही चीरहरण के दौरान द्रौपदी की रक्षा की थी।