What happened in Sadhak Sammelan-2023?

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**Bengaluru Ashram organized a series of #Cultural EVENTS on the occasion of "Maghi Purnima" on 5th Feb 2023 (Sunday), from 12:00 pm onwards… ** ◆Havan (Yajña), ◆Shri Asharamayan Path, ◆Annual Sadhak Sammelan, ◆Japa-Mala-Pujan Program, ◆Aarti & Prasadam.

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बेंगलुरु आश्रम में साधक सम्मेलन के साथ हुआ, “माला- पूजन” कार्यक्रम

कलियुग में हरिनाम जप ही मोक्ष का साधन

बेंगलुरु: इस नानाविध आधि-व्याधि से ग्रस्त कलिकाल में हरिनाम- जप, संसार सागर से पार होने का एक उत्तम साधन है। कलियुग में श्रीहरि की गुणगाथाओं का गान करने से मनुष्य भवसागर से पार हो जाता है। भगवान्नाम अनंत माधुर्य, ऐश्वर्य और सुख की खान है, सभी शास्त्रों में भगवन्नाम जप की महिमा का वर्णन किया है। भगवन्नाम जप की महिमा को दर्शाने व उनके गुणों को उल्लेखित करने हेतु प्रतिवर्ष की ही भांति इस वर्ष भी संत श्री आशारामजी आश्रम, बेंगलुरु में माघी पूर्णिमा (5 फ़रवरी 2023- रविवार) को साधक- स्नेह सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें साधकों के जप- माला की शुद्धि हेतु माला- पूजन का कार्यक्रम भी हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत पूज्य बापूजी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु की कामना हेतु- “महामृत्युंजय मंत्र” एवं उनके शीघ्र रिहाई के संकल्प के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण द्वारा विधिपूर्वक सामूहिक यज्ञ के आयोजन से हुई। तत्पश्चात् पूज्य बापूजी की जीवनलीला एवं साधना पर आधारित श्री आशारामायण का सामूहिक पाठ व विधिवत पादुका पूजन किया गया।

साधक सम्मलेन में बताया गया की- भगवन्नाम व गुरुज्ञान की महिमा तो निराली है। यह दुःखियों का दुख और रोगियों के रोग मिटा सकता है, पापियों के पाप नष्ट कर सकता है। नारद मुनि पिछले जन्म में दासीपुत्र थे, वे विद्याहीन, बलहीन थे। गुरूजी में आस्था –समर्पण और भगवन्नाम जप के प्रभाव से वे आगे चलकर देवर्षि नारद बन गये। ऐसी ही कृपा से कीड़े में से मैत्रेय ऋषि बन गये । ऐसे हमारे ज्ञानदाता- धर्मस्तंभ पूज्य संत श्री आशारामजी बापू को संस्कृति भक्षकों ने ही एक बहुत बड़ी साजिश के तहत षड्यंत्र करके फँसाया है। सन्त ही सनातन धर्म के सच्चे प्रहरी है। उनपर आघात हमारे धर्म पर आघात है। उनके ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने की सेवा के लिए ऋषि प्रसाद- मासिक पत्रिका की सदस्यता को बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

आश्रम में पंडित जी ने बताया की- “हमारे मंत्रजप करने की माला किसी न किसी कारण से अशुद्ध हो जाती है इसलिए वर्ष में कम से कम एक बार माला पूजन तो अवश्य करना चाहिए। माला पूजन होने के बाद माला में परमात्म चेतना का संचार तो हो ही जाता है, मंत्रजप का फल शीघ्र मिलता है और रुके हुए कार्य पूर्ण होते है। जिस माला से जप किया जाता है, उस माला के प्रति जितना श्रद्धाभाव होगा, उतना ही उससे किया जप फलदायी होता है। तत्पश्चात् माला पूजन का सामूहिक कार्यक्रम हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में 'श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। अंत में गुरुदेव की मंगल आरती की गई। आश्रम परिसर में भंडारा भी हुआ ।

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